एक मुलाकात रेलवे स्टेशन पर -A meeting at the railway station story


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एक मुलाकात रेलवे स्टेशन पर

सबसे ज्यादा वो लम्हें तकलीफ देती है जब …….

आँख के आंसू छुपाकर मुस्कुराना पड़ता है 

 

वह दिन मेरे ज़िन्दगी का सबसे अहम दिन था , जब मैं उस औरत से मिला था | जो मुझे अचानक से  रेलवे स्टेशन पर मिली थी वह दूसरे राज्य जा रही थी और मैं दूसरे राज्य | लेकिन ना जाने क्यों उसे देख कर लगा की वह अपने दिल में समंदर पाल कर रखी है , ना जाने उसकी आँखें कुछ बताना चाहती थी , ना जाने क्यों उसकी तरफ देख मुझे ऐसा लगा की इस औरत की ज़िन्दगी में ऐसा क्या हुआ है , जो इसे अपने आप से अलग कर रखा है |

[ नोट :- इस कहानी में की गई सारी बातें सच हैं और यह कहनी जिसकी है उसकी अनुमति से लिखी गई है – लेकिन फिर भी इस कहानी में कुछ काल्पनिक बाते जोड़ी गई है जैसे की – नाम , पता इत्यादि | ताकि जिनकी कहानी है उनकी आत्मविश्वास पर चोट ना पहुचे ]

 

हेलो दोस्तों मेरा नाम रंजन है और मैं बिहार और झारखण्ड का रहने वाला हूँ और उस औरत का नाम सूमित्रा  है जो मुझसे रेलवे स्टेशन पर मिली थी और वह चेनई की रहने वाली थी | जिससे मेरी मुलाकात भुबनेश्वर रेलवे स्टेशन पर हुई थी |

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मैं स्टेशन के 5 नंबर प्लेटफार्म पर बैठ कर हेडफ़ोन से  गाने सुन रहा था तभी वह औरत उठ कर आई और पूछी , ये जो trean आया रही है क्या वह चेनई जायेगी | तो मैंने कहा यह trean चेनई नहीं , illeur जाएगी , लेकिन आपको जिस trean से जाना है उसका नाम कोर मंडल एक्सप्रेस है जो चेनई तक जाएगी |

मैंने पूछा आपको  जाना कहाँ है तो उस औरत ने बताया की मुझे तमिलनाडु जाना है तभी मैंने पुछा की तब आप यहाँ क्या कर रही हैं | तो उसने बताया  की मेरे देवर के ACCIDENT हो गया था , तो मैं उसे देखने आई थी |

तभी वह एक बच्चा खेल रहा था तो मैंने उस औरत से पूछा की यह बच्छा आपका है , तो उसने कहा  की हाँ – यह मेरा बच्चा है  ,,,,

तो मैंने कह कितना सुन्दर बच्चा है ……

लेकिन मैंने उस औरत के अन्दर जो समन्दर देखा था जिसकी आँखें बहुत कुछ छुपाये बैठी थी ओ बाते अभी तक मुझे उसकी बातों में दिखी नहीं थी अभी तक असकी बेचैनी महसूस कर सकता था | लेकिन सब कुछ जान नहीं पा रहा था जिससे मेरी अन्दर की बैचैनी बढाती जा रही थी |

 

अब मुझसे रहा नहीं गया और मैंने सब पूछने की ठान ली |

मैंने कहा बहनजी आप अकेले आई है आप के घर से और कोई नहीं आया ……… ओ खुछ देर संत हो गई और दबे आवाज में कहा की कौन घर वाला मेरी किस्मत में नहीं है की मैं घर की सुख भोगु |

मुझे सुन कर अचम्भा हुआ की ये उन्होंने क्या कह दी …………

फिर उन्होंने बताया की उनके घर में ओ और उनके पति और देवर और उनकी छोटी बच्चा है और कोई नहीं |

मैंने कहा की ये सब तो हैं आपके घर फिर भी आप ने कहा की कौन घर वाला …..

उस औरत ने जबाब दिया की सब तो हैं घर में लेकिन कोई “अपना सा नहीं” है

 

मैंने उस औरत का जबाब सुन कर सारी बाते समझ गया ( जो औरत इतनी सी बात यानि “ अपन सा नहीं “ में अपनी जिन्दगी की सारी बाते बता दी ) मुझे बहुत अजीब लगा की और मुझे दुःख भी हुआ की इनके अन्दर समंदर नहीं बलकी खुद की लड़ाई चल रही है जो समंदर  से भी गहरी और खतरनाक है |

railway_station_meeting_story_by_edkshayari.com
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मैं सोच ही रहा था तभी देखा की उस औरत के आंखों में आंसू आ गया था और ओ मायूस हो कर रो रही थी …… जिसे मैं देख कर और टूट गया और मैं अपनी जगह से उठा और हमदर्दी से उन्हें चुप कराया और कहा की आप रोओ मत रोने से क्या मिलेगा | रोने से और तकलीफ बढती है देखिये आप का बच्चा देख रहा है और ओ भी मायूस हो रहा है क्या आप चाहती हैं की वो भी माउस हो वो भी रोये ………

ये बात सुन कर वो चुप हो गयी और अपनी आंसू पोछते हुए बोली नहीं मैं अपने बच्चे को कभी किसी चीज की कमी नहीं होने दूंगी और वह अपने बच्चे को उठा कर चूमने लगी  ……

उनके उस बच्चे के प्रति इस तरह प्रेम देख कर मेरे भी आँखों में आंसू आ गये और मैं भी उस वक्त अपनी माँ को miss करने लगा |

 

तभी उस ओरत ने मुझे कुछ कहा की आप कहाँ खो गये

मैंने कहा नहींनहीं मैंने बस आपका आपके बच्चे के प्रति प्रेम देख कर अपनी माँ को miss करेने लगा था …. by the way आप कुछ बता रही थी अपने परिवार के बारे में ……………

तब उस औरत ने कहा की जी हाँ बस यही कहानी है मेरे ज़िन्दगी की जो मैं इस ज़िन्दगी में भोग रही हूँ मैं तो कब का आत्महत्या कर लेती , लेकिन मैं अपने बच्चे के लिए जिंदा हूँ | उसके लिए इस ज़िन्दगी से लड़ने के लिए तैयार हूँ |

चाहे इस ज़िन्दगी में खुछ भी हो जाए लेकिन में अपने बच्चे का हाथ नहीं छोडूंगी इस ज़िन्दगी में ….

मैं इसका भविष्य अपने बेकार पति के हाथों में नहीं सौंपूंगी ……..

मैं अपने बच्चे की ज़िन्दगी को अच्छे तरह से सवारुंगी और उसको एक अच्छा इन्सान बनाउंगी ……

 

और कुछ ही पल में उनकी trean आ गई और वह अलबिदा बोल कर चली गई और मैं अपने trean का इंतजार करने लगा ………

कहानी का नैतिक ( moral of story ).

इस कहानी में जैसे आपने पढ़ा की एक महिला की ज़िन्दगी किस तरह मुस्किल होती है…

इससे यह शिखने मिला की किसी भी महिला को तकलीफ नहीं देनी चाहिए …..

इस कहानी से यह जानने को मिला की एक पिता अपने बच्चे के प्रति प्रेम ना रखे , लिकिन माँ एक ऐसी देवी है जो चाहे कितने भी मुसीबत हो ओ अपने बच्चे को कभी त्याग नहीं सकती …….

If you have a love in your life, who turns any moment of sadness into a marvelous one. Then this quote is for them. Share this love quote with your lover and see the smile on their face. It will be priceless.

 

यह कहानी कैसी लाही COMMENT में जरूर बताए ………………

 

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