best emotional child life story with moral in Hindi and English


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ये कहानी नहीं पढ़ी तो क्या पढ़ी – best emotional child life story with moral

ये कहानी ऐसी है जो आज के चलन पर है जो एक बात समझाता है की लोग कितने भी Hi-tech हो जाए | फिर भी ओ सोच से हमेसा छोटे ही रहेंगे , क्योकिं आज के लोग सिर्फ अपना पैसा , अपना घर , अपना परिवार , अपना ज़िन्दगी , अपनी गर्लफ्रेंड , अपनी इज्ज़त…. सिर्फ अपना सोचने में लगे है | ओ ये नहीं देखते है की उनके सिर्फ अपना सोचने से किसी को हानी भी होती है |

किसी के घर में चूल्हा भी नहीं जलाता है , किसी को एक वक्त के खाने के लिए लड़ना पड़ता है |  किसी को अपनी इज्ज़त बचने के लिए जद्दो – जहद करनी पड़ती है | ओ ये नहीं जानते की उनकी ये सोच से किसी गरीब के घर क्या – क्या मुसीबतें आती है |

क्या मुशीबतें आती है चलिए जानते है ………………..



लेखक ( author ) कहते हैं |

 

मैं एक घर के करीब से गुजर रहा था की अचानक से मुझे उस घर के अन्दर से एक बच्चे की रोने की आवाज आई | उस बच्चे की आवाज में इतना दर्द था की अन्दर जा कर , वह बच्चा क्यों रो रहा है , यह मालूम करने से मैं खुद को रोक ना सका |

अन्दर जा कर मैंने देखा की एक माँ अपने 10 साल के बेटे को आहिस्ता से मारती और बच्चे के साथ – साथ खुद भी रोने लगाती | मैंने आगे होकर पूछा बहनजी आप इस छोटे से बच्चे को क्यों मार रही हो ? जब की आप खुद भी इसके साथ रो रही हो |

उस ने जवाब दिया , भाई साहब इसके पिताजी भगवान को प्यारे हो गये हैं और जिसके कारण हमारे घर के खर्च बहुत मुस्किल से चल रहें हैं | हम लोग बहुत ही गरीब हैं , उनके जाने के बाद मैं लोगों के घरों में काम करके , अपने घर और इसकी पढाई का खर्च बहुत मुश्किल से उठती हूँ और यह कमबख्त स्कूल रोजाना दे से जाता है और रोजाना घर देर से आता है |

जाते हुए रास्तों में कहीं खेल – कूद में लग जाता है और पढाई की तरफ जरा भी ध्यान नहीं देता है जिस की वजह से रोजाना अपनी स्कूल का वर्दी गंदा कर लेता है | मैंने बच्चे और उसकी माँ को जैसे – तैसे समझाया और वहां से चल दिया |

इस घटना को कुछ दिन ही बीते थे की एक दिन सुबह – सुबह कुछ काम से मैं सब्जी मंदी गया | तो अचानक मेरी नजर उस 10 साल के बच्चे के ऊपर पड़ी जो रोजाना घर से मार खता था | मैं क्या देखता हूँ की वह बच्चा मंडी में घूम रहा है और जो दुकानदार अपनी दुकानों के लिए सब्जी खरीद कर अपनी बोरियों में डालते , तो उसमें से कोई सब्जी जमीन पर गिर जाती थी तो वह बच्चा उस फ़ौरन उठा कर अपनी झोली में डाल लेता था |

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मैं ये नजारा देखा कर आश्चर्य में पड़ गया की आखिर ये चक्कर क्या है , मैं उस बच्चे का चोरी – चोरी पीछा करने लगा | जब उस की झोली सब्जी से भर गई तो वह सड़क के किनारे बैठ कर उसे ऊँची – ऊँची आवाजें लगा कर वह सब्जी बेचने लगा | मुंह पर मिट्टी गन्दी वर्दी और आँखों में नमी, ऐसा महसूस हो रहा था कि ऐसा दुकानदार ज़िन्दगी में पहली बार देख रहा हूँ |

अचानक एक आदमी अपनी दुकान से उठा जिस की दुकान के सामने उस बच्चे ने अपनी नन्ही सी दुकान लगाई थी | उसने आते ही एक जोरदार लात मार कर उस नन्ही दुकान को एक ही झटके में रोड पर बिखेर दिया और बाजुओं से पकड़ कर उस बच्चे को भी उठा कर धक्का दे दिया |

वह बच्चा आंसू लिए चुप – चाप दोबारा अपनी सब्जी को इकठ्ठा करने लगा और थोड़ी देर बाद अपनी सब्जी एक दूसरे दुकान के सामने डरते – डरते लगा ली | भला हो उस शख्स का जिस की दुकान के सामने इस बार उसने अपनी नन्ही सी दुकान लगाई थी , उस शख्स ने बच्चे को कुछ नहीं कहा |

थोड़ी सी सब्जी थी ऊपर से बाकी दुकानों से कम कीमत | जल्द ही बिक्री हो गई सारी सब्जियां और वह बच्चा उठा और बाजार  में एक कपडे वाली दुकान में दाखिल हुआ और दुकानदार को वह पैसे देकर , दुकान में पड़ा अपना स्कूल बैग उठाया और बिना कुछ कहे वापस स्कूल की ओर चल पड़ा और मैं भी उस के पीछे – पीछे चल पड़ा |

रास्ते में एक चापा कल था जिस पर बच्चा जाकर अपना मुँह – हाथ , पैर धो कर स्कूल की और चल दिया | मैं भी उसके पीछे – पीछे चल गया | जब ओ बच्चा स्कूल पहुँचा तो 1 घंटा लेट हो चूका था , जिस पर उस के टीचर ने डंडे से खूब मारा | मैंने जल्दी से जा कर उस टीचर को मना किया की मासूम बच्चा है इसे मत मारो | टीचर कहने लगे की यह रोजाना 1 से 1:30 घंटे लेट से ही आता है और मैं रोजाना इसे सजा देता हूँ कि कम से कम डर से स्कूल वक्त पर आए और कई बार मैं इस के घर पर भी खबर दे चूका हूँ |

खैर बच्चा मार खाने के बाद क्लास में बैठ कर पढ़ने लगा | मैंने उसके टीचर के मोबाइल नंबर लिया और  अपने घर की तरफ चल दिया | घर पहुच कर एहसास हुआ की जिस काम के लिए मैं सब्जी मंडी  गया था वह तो भूल ही गया | मासूम बच्चे ने घर आकर एक बार फिर  माँ  से मार खाई | उधार  मेरा सर चकराता रहा उस बच्चे के बारे में सोच कर सारी रात |

सुबह उठ कर फौरन बच्चे के टीचर को कॉल किया कि मंडी टाइम पर , हर हाल में पहुंचे और ओ मान गये | सूरज निकला और बच्चे का स्कूल जाने का वक्त हो गया | वो बच्चा घर से सीधा मंडी अपने नन्ही सी दुकान का इंतजाम करने को निकला | मैंने उसके घर जाकर उसकी माँ को कहा कि बहनजी आप मेरे साथ चलो मैं आपको बताता हूँ कि आप का बेटा स्कूल क्यों देर से जाता है |

वह फ़ौरन मेरे साथ चल पड़ी ये कहते हुए की आज इस लड़के को मेरे हाथों खैर नहीं , छोडूंगी नहीं उसे आज , हमेसा स्कूल देर से पहुचता है | मंडी में लड़के का टीचर भी आ चूका था | हम ने मंडी की 3 जगहों पर पोजीशन संभाल ली , और उस लड़के को छुप कर देखने लगे | आज भी उस लड़के को काफी लोगो से डांट – फटकार और धक्के खाने पड़े और आखिरकार वह लड़का अपनी सब्जी बेचकर कपडे वाली दूकान पर चल दिया |

अचानक मेरी नाजर उसकी माँ पर पड़ी तो क्या देखता हूँ कि वह बहुत ही दर्द भरी सिसकियाँ लेकर लगातार रो रही थी , और मैंने फ़ौरन उस के टीचर की तरफ देखा तो उसके भी बहुत सिद्दत से उसके आंसू बह रहे थे | दोनों के रोने में मुझे ऐसा लग रहा था की जैसे उन्होंने किसी मासूम पर बहुत जुल्म किया हो और आज उन को अपनी गलती का एहसास हो रहा हो |

उसकी माँ रोते – रोते घर चली गयी और टीचर भी सिसकियाँ लेते हुए स्कूल चल गया | बच्चे ने दूकानदार को पैसे दिया और दुकानदार आज उसको एक लेडी सूट देते हुए कहा कि बेटा आज सूट के सारे पैसे पूरे ह गये हैं | अपना सूट ले लो , बच्चे ने उस सूट को पकड़ कर स्कूल बैग में रखा और स्कूल चल गया |

आज भी वह 1 घंटा देर से पहुंचा स्कूल , वह सीधा टीचर के पास गया और बैग डेस्क पर रख कर मार खाने के लिए अपनी पोजीशन संभाल ली और हाथ आआगे बढ़ा दिया , ताकि टीचर डंडे से मार ले | टीचर कुर्सी से उठा और फ़ौरन बच्चे को गले लगा लिया और इस कदर जोर – जोर से रोया की मैं भी देख कर अपने आंसुओ पर काबू ना रख सका |

मैंने अपने आप को संभाला और आगे बढ कर टीचर को चुप कराया और बच्चे से पूछा कि यह बैग में जो सूट है , वह किस के लिए है | बच्चे ने रोते हुए जबाब दिया कि मेरी माँ आमिर लोगों के घरों में मजदूरी करने जाती है और उसके कपडे फाटे हुए होते हैं | कोई पूरी तरह जिस्म को ढापने वाला सूट नहीं है और मेरी माँ के पास पैसे नहीं है , इस लिए अपने माँ के लिए यह सूट खरीदा है |

तो यह सूट अब घर जाकर अपने माँ को दोगे ? मैंने बच्चे से सवाल पूछा | बच्चे के जबाब ने मेरे और उस बच्चे के टीचर के पैरों तलें जमीं ही निकल दी | बचे ने जवाब दिया नहीं अंकल छुटती के बाद मैं इसे दर्जी को सिलाई के लिए दे दूंगा अभी यह पूरी नहीं हुई है | रोजाना स्कूल से जाने के बाद काम करके थोड़ा – थोड़ा पैसे सिलाई के लिए दर्जी के पास जमा किये हैं |

टीचर और मैं यह सोच कर रोते जा रहे थे की आख़िर कब तक हमारे समाज में गरीबो के साथ ऐसा होता रहेगा , उनके बच्चे त्योहार की खुशियों में शामिल होने के लिए जलाते रहेंगे , आख़िर कब  तक |

क्या ऊपर वाले की खुशियों में इन जैसे गरीब का कोई हक़ नहीं है ? क्या हम अपनी खुशियों के मौके पर अपनी ख्वाहिशों में से थोड़े पैसे निकाल कर अपने समाज में मौजूद गरीब और बेसहारों की मदत नहीं कर सकते |

आप सब एक बार अपने दिल पर हाथ रख कर एक बार जरूर सोचना ????

अगर हो सके तो इस लेख को उन सभी सक्षम लोगों को बताना ताकि हमारी इस छोटी सी कोशिश से किसी भी सक्षम के दिल में गरीबों के प्रति हमदर्दी का जज्बा ही जाग जाए और यही लेख किसी भी गरीब की खुशियों की वजह बन जाए |



कहानी का नैतिक ( moral of story ).

इस कहानी में बच्चा कितनी मुश्किल हालात से लड़ कर अपने माँ के लिए सूट सिला रहा था | ये उसका बिश्वास था जो उसे इन कड़ी परिस्थितियों में भी खड़े रहने का ताकत दे रहा था |

अगर हम सभी किसी भी परिस्थितियों में अपने ऊपर विश्वास बनाये रखे तो हम कुछ भी कर सकते हैं | हम कुछ भी पा सकते है |

 

 

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